tax slab for having only agrculture income
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basic exemption limit for different types of tax payers
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आयकर दाखिल करते समय मूल छूट सीमा (Basic Exemption Limit for Different Taxpayers) आयकर दाखिल करते समय, यह समझना महत्वपूर्ण है कि आय के एक निश्चित हिस्से पर कर नहीं लगता है. इस राशि को मूल छूट सीमा (Basic Exemption Limit) के रूप में जाना जाता है. भारत में, मूल छूट सीमा विभिन्न प्रकार के करदाताओं के लिए भिन्न-भिन्न होती है. आइए, इसे थोड़ा और विस्तार से समझते हैं: मूल छूट सीमाएं (Exemption Limits) वित्त वर्ष 2023-24 के लिए लागू मूल छूट सीमाएं इस प्रकार हैं: 60 वर्ष से कम आयु वाले व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF): ₹ 2.5 लाख 60 वर्ष से 80 वर्ष की आयु वाले वरिष्ठ नागरिक: ₹ 3 लाख 80 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिक: ₹ 5 लाख ध्यान दें: ये सीमाएं पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) और नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) दोनों के लिए समान हैं. कर व्यवस्था का चयन (Choosing Your Tax Regime) आप पुरानी कर व्यवस्था या नई कर व्यवस्था में से किसी को भी चुन सकते हैं. आपकी आय, निवेशों और कटौतियों के आधार पर, एक व्यवस्था आपके लिए दूसरी व्यवस्था से अधिक लाभदायक हो सकती है. मूल छूट सीमा के अला...
basic exemption limit for capital gain tax payers
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पूंजीगत लाभ करदाताओं के लिए मूल छूट सीमा (Basic Exemption Limit for Capital Gain Taxpayers) भारत में पूंजीगत लाभ (Capital Gain) पर कर लगता है, लेकिन हर पूंजीगत लाभ पर नहीं. सरकार कुछ राहत देती है, जिसे मूल छूट सीमा (Basic Exemption Limit) कहा जाता है. इस सीमा तक के पूंजीगत लाभ पर आपको कोई कर नहीं देना होता. आइए, इस बारे में विस्तार से जानें. पूंजीगत लाभ क्या होता है? (What is Capital Gain?) जब आप किसी संपत्ति को उसके खरीद मूल्य से अधिक मूल्य पर बेचते हैं, तो आपको पूंजीगत लाभ होता है. उदाहरण के लिए, यदि आपने ₹5 लाख में शेयर खरीदे और बाद में उन्हें ₹7 लाख में बेच दिया, तो आपका पूंजीगत लाभ ₹2 लाख होगा (₹7 लाख - ₹5 लाख). मूल छूट सीमा क्या है? (What is the Basic Exemption Limit?) मूल छूट सीमा वह राशि है जिसे पूंजीगत लाभ से घटाया जाता है. इस सीमा तक के शेष पूंजीगत लाभ पर ही कर लगता है. वर्तमान में (वित्त वर्ष 2023-24 के लिए), भारत में पूंजीगत लाभ करदाताओं के लिए मूल छूट सीमा ₹1 लाख है. इसका मतलब है कि यदि आपके पूंजीगत लाभ की राशि ₹1 लाख से कम है, तो आपको उस पर कोई कर नहीं देना होगा. उ...
basic exemption limit
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आयकर दाखिल करते समय मूल छूट सीमा को समझना (Understanding Basic Exemption Limit While Filing Income Tax) आयकर दाखिल करना एक भारतीय नागरिक के लिए एक महत्वपूर्ण वार्षिक प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया को समझने के लिए, "आधारभूत छूट सीमा" (Basic Exemption Limit) की अवधारणा को जानना आवश्यक है. मूल छूट सीमा क्या है? (What is Basic Exemption Limit?) आधारभूत छूट सीमा वह अधिकतम आय राशि है जिस पर आपको कोई आयकर नहीं देना होता है. दूसरे शब्दों में कहें, तो यह वह सीमा है जिसके अंतर्गत आपकी कमाई को कर से मुक्त माना जाता है. सरकार हर साल वित्तीय वर्ष के लिए आधारभूत छूट सीमा तय करती है. यह सीमा आपकी आयु और कर व्यवस्था के चुनाव के आधार पर भिन्न हो सकती है. वर्तमान आधारभूत छूट सीमाएं (Current Basic Exemption Limits) भारत में वर्तमान में दो तरह की कर व्यवस्थाएं हैं: पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) और नई कर व्यवस्था (New Tax Regime). आप इनमें से किसी को भी चुन सकते हैं. हालांकि, दोनों व्यवस्थाओं में आधारभूत छूट सीमाएं थोड़ी भिन्न हैं (वित्त वर्ष 2023-24 के लिए): पुरानी कर व्यवस्था: 60 वर्ष से कम...
capital gain tax
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पूंजीगत लाभ कर: भारत में निवेश पर लगने वाला कर (Capital Gains Tax: Tax on Investment Gains in India) आयकर दाखिल करते समय, आपको न केवल अपनी वेतन आय पर बल्कि अन्य स्रोतों से हुई आय पर भी कर देना होता है, जिसमें पूंजीगत लाभ (Capital Gains) भी शामिल है. पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax - CGT) तब लगता है, जब आप किसी पूंजीगत संपत्ति (Capital Asset) को बेचते हैं और आपको उस पर लाभ होता है. आइए, भारत में पूंजीगत लाभ कर को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं. पूंजीगत संपत्ति क्या होती है? (What is a Capital Asset?) पूंजीगत संपत्ति वह संपत्ति है जिसे आप पूंजी निवेश के रूप में रखते हैं और जिसे बेचा जा सकता है. इसमें कई चीजें शामिल हो सकती हैं, जैसे कि: शेयर और स्टॉक (Shares and Stocks) म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) अचल संपत्ति (Real Estate) सोना (Gold) जमीन (Land) पूंजीगत लाभ के प्रकार (Types of Capital Gains) पूंजीगत लाभ दो प्रकार के होते हैं: दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long-Term Capital Gains - LTCG): यह लाभ तब होता है, जब आप किसी पूंजीगत संपत्ति को एक निश्चित अवधि से अधिक समय तक रखने के बाद बेचते ...